अध्याय 112

“मुझे अब भी तुमसे माफ़ी मांगनी है। मुझे तुम्हारी प्रेग्नेंसी के बारे में पता नहीं था। अगर पता होता, तो मैं चीज़ों को ज़्यादा समझदारी से संभालता।”

फोन के उस पार सेठ की आवाज़ भारी और थकी हुई लग रही थी। लैला फर्श से छत तक वाली बड़ी खिड़की के पास कालीन पर चुपचाप बैठी थी, नज़र बाहर के नज़ारे पर टिकी हु...

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